Friday, September 14, 2018

एनआरसी की मांग का माहौल

जेपी एनआरसी के मुद्दे को गरमाने के लिए कई तरकीबें अपना सकती है. मेघालय के राज्यपाल ने केंद्र को पत्र लिखकर माँग की है कि वहाँ भी नागरिकों का रजिस्टर बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाए.
ये कवायद वह अपने शासन वाले तमाम राज्यों से करवाकर ऐसा माहौल बनवा सकती है कि पूरा देश ही एनआरसी चाहता है.लाँकि असम में जो कुछ हो रहा है वह 1985 में हुए असम समझौते के आधार पर हो रहा है. उसमें 1971 के बाद आए बांग्लादेशियों को वापस भेजने का वादा किया गया था.
ऐसा समझौता किसी और राज्य में नहीं हुआ है. मगर बीजेपी को इससे क्या फ़र्क पड़ता है. वह तो राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर नया अभियान छेड़ सकती है.
मुश्किल ये है कि एनआरसी के मुद्दे पर उससे भिड़ने के लिए कोई राजनीतिक दल तैयार नहीं है.
काँग्रेस खुद फँसी हुई है. उस पर तो पहले से ही आरोप लगाए जाते रहे हैं कि असम में बांग्लादेशियों की बढ़ती तादाद के लिए वही ज़िम्मेदार है. उसने वोट बैंक के लिए उन्हें आने दिया.
हालाँकि ये आंशिक तौर पर ही सच हो सकता है. बांग्लादेशियों के आने और बसने की वज़हें बहुत सारी हैं. उनमें ग़रीबी, बेरोज़गारी और उत्पीड़न प्रमुख हैं.
असम काँग्रेस नहीं चाहती कि वह विदेशियों का बचाव करते हुए नज़र आए. यही हाल केंद्रीय नेतृत्व का है. इसलिए वे बहुत संभलकर अपने पत्ते चल रही हैं. ऐसे में बीजेपी को खुलकर खेलने का मौक़ा मिल रहा है.
वैसे ये ज़रूरी नहीं है कि असम जैसा रिस्पाॉन्स उसे शेष भारत में भी मिले. बाक़ी देश में ये कोई बड़ी समस्या नहीं है. अलबत्ता ये ख़तरा ज़रूर है कि अगर बंगाल और कुछेक राज्यों में हिंसा का दौर शुरू हो जाए और लोग उससे बिदकने लगें.
ताज महल की बद से बदतर होती हालत को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को आखिरकार इतना कड़ा रुख अपनाना पड़ा था.
और, 17वीं सदी की इस बेशक़ीमती धरोहर को बचाने के लिए अदालत ने मामले की नियमित सुनवाई शुरू कर दी की है. तो सवाल उठता है कि क्या दुनिया की अज़ीम-ओ-शान इमारत ख़तरे में है? क्या ये ख़तरा बढ़ता ही जा रहा है? क्या एक दिन ऐसा भी आ सकता है कि ताज महल गिर जाएगा या ज़मींदोज़ हो जाएगा?
ये सवाल खड़ा हो रहा है ताज महल और उसके आस पास बढ़ रहे वायु और जल प्रदूषण की वजह से.
हालात कुछ यूं हो गए हैं कि ताज महल में लगा संग-ए-मरमर बदरंग हो रहा है. हालाँकि इसके निर्माण में बादशाह शाहजहाँ ने राजस्थान के सबसे महंगे संग-ए-मरमर का इस्तेमाल किया था जिसे मकराना से लाया गया था. इस संग-ए-मरमर की खासियत यह है ये सुबह के वक़्त गुलाबी नज़र आता है, दोपहर के वक़्त सफ़ेद और शाम ढलते ही एकदम दूधिया.
मगर बढ़ते प्रदूषण ने सब कुछ बदलकर रख दिया है, इमारत की रौनक़ फीकी पड़ती जा रही है.
इसकी नींव कमज़ोर होती जा रही है और शाहजहाँ के वक़्त से ही बसा हुआ ताजगंज का इलाक़ा भी अब ख़तरे में आ गया है.
ताज महल में जगह-जगह दरारें पड़ने लगीं हैं जो अब गहराती जा रही हैं. जगह-जगह मीनारों के ऊपरी हिस्से भी टूटने के कगार पर हैं और जो प्रयास इन दरारों को भरने के लिए हो रहे हैं वो भी नाकाफ़ी हैं.
दो दशकों से भी ज़्यादा से ताज महल की देखरेख करने वाले पुरातत्व विभाग से सेवानिवृत आर के दीक्षित कहते हैं: "प्रदूषण से ताज महल को सबसे बड़ा ख़तरा है. चाहे वो वायु प्रदूषण हो या जल प्रदूषण. यही कारण है कि इस इमारत में कई जगहों पर दरारें पड़ने लगीं हैं." यावरणविदों और पुरातत्व वैज्ञानिकों ने सरकार और सुप्रीम कोर्ट को आगाह किया है कि ताज महल को संरक्षित करने की कार्रवाई अगर युद्ध स्तर पर नहीं की गई तो ये ‘मुहब्बत की निशानी’ कभी भी दरक सकती है या फिर गिर भी सकती है.
पर्यावरणविदों को यह भी अंदेशा है कि प्रदूषण की मार झेल रही ये एतिहासिक इमारत कहीं सिर्फ़ तस्वीरों में ही न रह जाए. निया के सात अजूबों में गिने जाने वाले, यूनेस्को की 'वर्ल्ड हेरिटेज' इमारत के बारे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह चुके हैं कि ताज महल भारत की विरासत का हिस्सा नहीं है. योगी की ये बात भी चिंता पैदा करने वाली है कि उनके नेतृत्व में चलने वाली उत्तर प्रदेश सरकार ताज के संरक्षण को कितनी गंभीरता से लेगी? ‘यूनेस्को’ हर दो साल में इस सूची की समीक्षा करती है.
दशकों से आगरा और उसके आसपास के कल-कारखानों से निकलने वाला धुआं, धूल और यमुना नदी के नाले में तब्दील हो जाने की वजह से ताज के भविष्य पर ही सवाल उठ रहे हैं.
ये सब कुछ अचानक नहीं हुआ. इस इमारत पर प्रदूषण का पहला हमला तब हुआ जब 'इंडियन ऑयल कार्पोरेशन' ने मथुरा में अपनी 'रिफाइनरी' की शुरुआत की थी. ये बात 70 के दशक की है. 'रिफाइनरी' के धुंए का सीधा असर ताज महल पर पड़ने लगा.
फिर वर्ष 1982 में 'ताज ट्रेपेजियम ज़ोन' का निर्माण हुआ जो 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. आगरा और ख़ास तौर पर ताज महल के आस-पास से प्रदूषण फैलाने वाले सभी उद्योगों को बंद करने का आदेश दिया गया. 'ताज तेपेजियम ज़ोन' में सिर्फ़ उन्ही उद्योगों को लगाने की अनुमति दी गई जो प्रदूषण नहीं फैलाते थे.
मगर हालात तब भी नहीं सुधरे और वर्ष 1984 में जाने-माने पर्यावरणवादी वकील एमसी मेहता ने उच्च न्यायलय में याचिका दायर की थी. फिर वो सुप्रीम कोर्ट चले गए. सुप्रीम कोर्ट ने कई एजेंसियों से सर्वेक्षण कराकर रिपोर्ट मंगवाई और फिर 1996 में आया सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला जिसके तहत आगरा शहर में डीज़ल के वाहनों और मशीनों पर प्रतिबन्ध का आदेश हुआ.
यमुना में जानवरों को नहलाने और लॉन्ड्री के कपड़े धोने पर प्रतिबंध लगाया गया. चमड़े की 'टैनरी' को हटाने के निर्देश दिए गए और तमाम उद्योगों को कहा गया कि वो गैस पर आधारित मशीनों का ही प्रयोग करें. कोयले का इस्तेमाल भी बंद किया गया.

Thursday, September 6, 2018

太阳不是全球变暖的原因

据《科学》杂志报道,两位北美科学家提出一个具有争议性的假说,认为太阳并不会对全球气候变暖造成影响。过往认为增加的太阳活动导致宇宙射线变化,从而减少了云量;而减少的云层又让更多阳光到达地球,造成地球温暖。他们对此假设进行了实验,结论是:变化过小,对气候影响微不足道。

卡内基梅隆大学的彼得亚当斯和达尔豪斯大学杰夫皮尔斯开发了一个模型,利用该模型测试太阳是否造成全球气候变暖。目前大多数科学家认同,温室气体是全球变暖的罪魁祸首。而一些气候变化怀疑者试图利用模型证明,这个假设未必成立。

《地球物理研究快报》刊登了这份研究。亚当斯和皮尔斯称,对第一大气的模拟显示,大气离子和粒子形式的变化造成了太阳和宇宙射线转变。他们发现,云层颗粒物浓 度的变化对气候变化的影响不及其对云层影响的百分之一。虽然他们同时承认,该过程非常复杂,没有一种计算机能将此模拟的准确无误。

“ 直到现在,这一假说的主张者仍可以声称太阳可能会造成全球变暖,因为没有人拥有真正达到测试要求的计算机模型。 ”亚当斯指出, “该假说最基本的概念是太阳能的变化可能使大气中新粒子形成率降低30 % 。此外,这些粒子非常小,需要成长到足够大才可影响云层,而大部分根本无法存活到那个时候。“
据英国《卫报》报道, 为了阻碍对巴拉克•奥巴马总统绿色能源计划的支持,美国煤炭、石油和天然气工业将游说预算提高了50%。在过去的一个季度里,关键策划者已经花费了44.5百万美元。他们的目的在于削弱甚至是扼杀致力于限制温室气体排放的“总量管制和排放交易”计划。

 考虑到其他国家在将于12月在哥本哈根召开的联合国气候变化会议之前依靠美国来引领减少气体排放,这项提议如果失败将会产生全球性的影响。假如提议失败,后《京都协议书》气候变化计划(2012年后减排计划)的强劲性和可行性就会大大降低。

温室气体排放与全球变暖息息相关,美国是温室气体人均排放量最大的国家。上述高风险加紧了对美国能源未来控制权的争夺。总统竞选媒体分析集团的发起者埃文•特雷西对《卫报》说,“大量的人因此得到了很多,也失去了很多,他们已经采取了相应的行动。”

气候变化立法的支持者认为他们对化石燃料利益的争夺大大超支。据传闻,该行业今年将要花费数亿美元用于游说者,广告,对关键立委的捐赠以及其他活动。

尽管此提议的全球意义重大,“总量管制和排放交易”法草案的命运却只掌握在几个美国民主党国会议院的手上。就权力平衡来说,他们尚未能支持奥巴马的能源改革计划。

Tuesday, September 4, 2018

इंडिया vs इंग्लैंड: हाथी निकल गया मगर दुम रह गई


ट्रेंट ब्रिज में मैच के चौथे दिन अगर सबसे ज्यादा किसी को याद रखा जाएगा तो वो हैं आदिल राशिद.9वें नंबर पर बैटिंग करने आए राशिद मैच को पांचवें दिन तक ले गए. 55 गेंदों पर 30 रन बनाकर ये खिलाड़ी नाबाद रहा. साथ में जेम्स एंडरसन भी हैं. इंडिया के लिहाज से ये वो कहावत है कि हाथी निकल गया मगर दुम रह गई. मगर मैच कौ चौथा दिन दो और लोगों लोगों के नाम रहा. पहला जोस बटलर और दूसरा जसप्रीत बुमराह.  बटलर ने इंडिया की जीत को शाम तक टाला जिसे राशिद ने अगले दिन तक खींच लिया. मगर जसप्रीत बुमराह के 5 विकेट को भी याद रखने की जरूरत है.
इंग्लैंड के चार विकेट 62 के स्कोर पर दिन के पहले ही सेशन में गिर गए थे. मगर यहां एंट्री जोस बटलर और बेन स्टोक्स ही हुई और दोनों ऐसे टिके कि मैच को आखिरी सेशन तक ले गए. बटलर ने शानदार 106 रन मारे और इस दौरान 21 चौके भी जड़े. एक वक्त तक लगता रहा कि ये मैच इंग्लैंड ड्रॉ की तरफ ले जा सकता है क्योंकि बटलर के साथ बेन स्टोक्स भी टिक गए थे. ये बटलर का पहला टेस्ट शतक है जो उस वक्त आया जिसकी टीम को सबसे ज्यादा जरूरत थी. वहीं स्टोक्स ने भी 62 रन बनाए. अभी इंग्लैंड का स्कोर 311/9 है.
यहां आखिरी सेशन में जब नई बॉल आई. कोहली ने गेंद दी बुमराह को. जसप्रीत बुमराह ने क्या शानदार ओवर फेंका. बटलर को एलबीडब्ल्यू किया. यहां से मैच पूरी तरह पलट गया. इन दोनों के बीच 169 रनों की साझेदारी हो गई थी. मगर अगली ही गेंद पर जेम्स बेयरस्टो को बुमराह ने बोल्ड मारा. इसके बाद एक ओवर छोड़ कर क्रिस वोक्स को ऋषभ पंत के हाथों कैच आउट करवा दिया. इंग्लैंड का अगला विकेट भी गिर ही गया था और बुमराह ने पारी में 5 विकेट लेने की बधाइयां भी ले लीं थी. मगर ये नो बॉल निकली. बुमराह का पैर लाइन से एक सेंटीमीटर के करीब बाहर था. मगर जब स्टुअर्ट ब्रॉर्ड और आदिल राशिद की 50 से ज्यादा रनों की पार्टनरशिप हो गई तो भी बुमराह ही वापस आए और ब्रॉर्ड को आउट कर इंग्लैंड का नौवां विकेट गिराया. यहां बुमराह ने 5 विकेट पूरे किए.
चौथे दिन जसप्रीत बुमराह का ये स्पेल हार्दिक पंड्या के दूसरे दिन के स्पेल जैसा था. बुमराह ने नई गेंद से फुर्ती में विकेट निकाले जिसकी टीम को जरूरत थी. बुमराह का ये लगातार दूसरा 5 विकेट हॉल है. पिछला साउथ अफ्रीका के खिलाफ इसी साल लिया था. अब पांचवें दिन टीम इंडिया सिर्फ एक विकेट लेने के लिए मैदान पर उतरेगी.शेखर कपूर ने बीते दिनों एक वृद्धा की तस्वीर ट्विटर पर शेयर करते हुए ऐसा लिखा. एक नज़र देखकर लगता है कि कौन ये औरत और इसके पास कोई स्टार क्यों जाएगा. क्या वो कोई सिद्ध औरत है, कोई ज्योतिषी या कोई गुड लक लाने वाली औरत है? असल में नहीं. ये महज एक चाय वाली है. जिसका छोटा सा खोखा देखकर लगता है कि उसके पास उतने पैसे भी नहीं होंगे जितने किसी मशहूर चाय वाले के पास होते हैं.
शेखर कपूर ने ट्वीट में लिखा कि ये औरत 100 साल की है. और जाने कबसे चाय पिला रही है. यहां तक कि उन्होंने नेहरू को भी चाय पिलाई है. एक ऐसा वाकया जिसे याद करते हए हरदी बाई की आंखें चमक उठती हैं.
हरदी बाई रैकवार खजूराहो के पश्चिमी मंदिर समूह के पास एसबीआई बैंक के सामने झोपड़ी बनाकर रहती हैं. कई साल पहले इनके पति की मौत हो गई थी. जिसके बाद इनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं था. तो इन्होंने वहीं पे चाय कि दुकान खोल ली. शेखर कपूर और जैकी श्रॉफ की मानें तो आज भी इनके हाथों में जादू है. इनके हाथों की चाय कि लज्ज़त ही और है!
कहते हैं मुंबई संघर्षों का शहर है. यहां जितने सपने सच होते हैं, उसके सौ गुना रोज मरते हैं. ये आश्चर्य की बात नहीं कि सालों-साल इंडस्ट्री में मेहनत कर स्टार बनने वाले एक सादगी से भरी 100 साल की बुढ़िया के पास मन की राहत पाते हैं.