Thursday, August 30, 2018

能源产业用水需求恐引发全球危机

世界水周”论坛于本周在斯德哥尔摩开幕,与会专家发出警告:未来,水资源和能源之间的供需关系有可能引发全球危机,但各国还没有充分认识到问题的严重性,中国尤其如此。

全球日益增长的能源需求推动用水量不断增加。预计到2035年,能源消耗将增长35%,相应推动用水量增长85%。
“预测显示,对水资源的需求将在未来几十年里大幅增加,能源生产则是其主要用途之一”,“世界水周”论坛主办方斯德哥尔摩国际水资源研究所执行董事托里尼·霍姆格伦如是说。

水资源和能源供给关系紧密结合。水资源短缺将在短时间内引发能源危机,反之亦然。例如,2011年严重的干旱迫使长江流域一带一千多个大坝停止运行,造成了大规模电力短缺。

但二者之间的联系远不止于此。几乎所有的能源生产都需要用水,提取、净化和分配水也都离不开使用能源。
 
能源和水资源的冲突在中国尤其突出,这是因为其能源开发用水和使用水资源所消耗的能源数量庞大,且不断增长。

水资源会推动经济发展,水资源日益短缺则威胁到了中国的能源生产和经济发展。众所周知,中国对耗水量极大的煤炭产业十分依赖,其中70%的燃煤电厂都位于干旱的北方地区,目前近一半的电厂遭受水资源短缺的威胁。

天然气、核能和水力等可替代煤炭的能源也受到水资源的限制。核电站需要大量的水进行冷却;几乎所有页岩气储量丰富的地区(如西北地区的塔里木盆地),水资源的供应都很有限;虽然是全球最大的太阳能市场及全球领先的太阳能产品制造商,但制造产品部件和清洗电池板同样对水有需求。

很少为人所知的是,使用水资源所消耗的能源正在迅速增加。诸如南水北调工程、渤海湾管道引水工程这样的大型调水项目都需要大量的能源做后盾。以南水北调东线为例,这里每年要消耗上百万吨的煤炭用于发电调水,给水资源短缺带来进一步的压力。

海水淡化是能源和水资源冲突的又一实例。目前,中国正努力提高海水淡化能力,计划将日淡化能力从60万吨提高到2020年的250万吨到300万吨。相比较于其他处理措施,海水淡化的单位水能耗要高出10倍。中国东部沿海地区正在建设一批海水净化厂,为缺水地区的燃煤电厂提供用水,而这又将推动煤炭能源的进一步增长。

再加上政府计划到2020年实现2.7亿农村人口落户城镇,这就意味着在未来的20年里,政府需要在城市能源和水资源领域投入大量资金。

中国的能源和水资源危机也影响到了周边邻国。中国在澜沧江和雅鲁藏布江等国际河流上修建大坝的行为可能会造成与邻国的摩擦;中国与中亚的能源贸易也可能威胁到地区稳定。

其他的国家也面临着同样的挑战。也门政府正绞尽脑汁寻找充足的能源进行海水淡化,来满足国内的用水需求。印度政府为农民免费提供抽取地下水所需的柴油。该政策赢得了群众的支持,但代价却是北部地区的含水层被抽取殆尽。

发达国家也难逃困局。美国加州是水能源危机的典型代表,目前正遭受史上最严重的干旱。为确保城市中心用水和农业灌溉用水,加州需要从几百英里以外的地方引水,途中还要翻过两座山。

今年的“世界水周”论坛重点关注水资源和能源的联系()。与会专家一致呼吁提高水资源的使用效率、加强部门间的合作。托里尼·霍姆格伦表示,“未来十年,‘水资源利用效率’将成为解决水资源问题的关键,我们应当将这个概念运用到日常的生活中去。”

为解决水资源和能源的冲突,很少有国家把数据收集和政策制定放在首位考虑的地位。来自荷兰水足迹网络的亚历山德拉·弗雷塔斯表示,计算能源开发用水的水足迹和使用水资源消耗能源的能源足迹,可以帮助政策制定者理解能源和水资源相互依存的关系,做好权衡取舍。
 
尼泊尔前能源与水资源部部长迪帕克·吉亚瓦利表示:“能源足迹和水足迹的概念是一个强有力的工具,如果非政府组织和社会积极人士能够充分利用它,那么它就有了催动变革的巨大潜力。否则,它就不会受到关注。”

Tuesday, August 28, 2018

सुब्रमण्यम स्वामी के कारण भारत मालदीव में बढ़ी टेंशन?

मालदीव के स्थानीय मीडिया के अनुसार वहां के भारतीय राजदूत अखिलेश मिश्रा को समन भेजा गया है.
मालदीव के स्थानीय मीडिया का कहना है कि मालदीव के विदेश मंत्रालय ने मिश्रा को बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के एक ट्वीट को लेकर समन भेजा है.
स्वामी ने 24 अगस्त को एक ट्वीट कर कहा था कि 23 सितंबर को मालदीव में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में अगर धांधली होती है तो भारत को हमला कर देना चाहिए.
स्वामी ने ये बात श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद से मुलाक़ात के बाद कही थी.
मोहम्मद नशीद निर्वासित जीवन जी रहे हैं.
नशीद ने स्वामी से मालदीव में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में धांधली की बात कही थी.
स्वामी के इस ट्वीट से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है.
हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस ट्वीट पर स्पष्टीकरण भी दे चुके हैं. उन्होंने कहा है कि स्वामी का ट्वीट उनकी निजी सोच है और इस ट्वीट को भारत सरकार की आधिकारिक राय से नहीं जोड़ना चाहिए.
हालांकि जब विवाद बढ़ा, तो स्वामी ने दो दिन बाद एक ट्वीट कर सफ़ाई भी दी. उन्होंने 26 अगस्त को किए एक ट्वीट में लिखा है, ''मालदीव की वर्तमान सरकार मेरे 'अगर मगर' वाले बयान से परेशान क्यों है. मालदीव में रह रहे भारतीय पहले से ही डरे हुए हैं. हमें अपने नागरिकों की सुरक्षा करनी है.''
स्वामी के इस ट्वीट को मालदीव में हाथों-हाथ लिया गया. मालदीव की वर्तमान सरकार चीन के क़रीब मानी जाती है और ये भी कहा जाता है कि भारत से इस सरकार के रिश्ते अच्छे नहीं हैं.
ऐसे में स्वामी का ट्वीट आग की तरह फैला.
मालदीव की स्थानीय भाषा धिवेही के अख़ाबार मिहारू में ख़बर छपी है कि मालदीव के विदेश सचिव अहमद सरीर ने भारतीय राजदूत अखिलेश मिश्रा को बुलाकर सवाल-जवाब किया है.
हालांकि अंग्रेज़ी अख़बार मालदीव इंडिपेंडेंट से मालदीव के विदेश मंत्रालय की राजनीतिक निदेशक हीना वलीद ने कहा है कि उन्हें अभी तक समन भेजने की सूचना नहीं मिली है.
हीना वलीद ने कहा है कि भारतीय राजदूत अखिलेश मिश्रा रविवार को विदेश मंत्रालय गए थे. उन्होंने कहा कि मिश्रा ने विदेश मंत्री डॉ मोहम्मद असीम और सात अन्य राजनयिकों से बातचीत की थी.
माले में भारतीय दूतावास की प्रेस अधिकारी अर्चना नायर ने भी मालदीव इंड़िपेंडेंट से कहा है कि उन्हें समन की जानकारी नहीं है और वो स्थानीय मीडिया के आधार पर कुछ कह नहीं सकतीं.
मालदीव के इस्लामिक गुट जमीयातुल सलफ़ ने स्वामी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. इस गुट ने मोहम्मद नशीद पर निशाना साधते हुए कहा है कि अपने ही देश के नेता हमले के लिए उकसा रहे हैं.
इस समूह ने एक बयान में कहा है, ''हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि एक स्वतंत्र और संप्रभु इस्लामिक राष्ट्र को अपने ही लोगों द्वारा दुश्मनों के साथ मिलकर ख़तरे में डालना शरिया में बड़ा पाप है.''
पिछले कुछ सालों में भारत और मालदीव के रिश्ते बहुत ख़राब हुए हैं. जो मालदीव कभी भारत के क़रीब हुआ करता था अब चीन के पाले में है. भारत और मालदीव के रिश्तों में इस साल सबसे ज़्यादा कड़वाहट आई है.
इसकी शुरुआत मालदीव के सुप्रीम कोर्ट के एक फ़रवरी के फ़ैसले से हो गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया था कि राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने विपक्ष के नेताओं को क़ैद करवाकर संविधान और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है.
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि सरकार पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद समेत सभी विपक्षी नेताओं को रिहा करे. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने मानने से इनकार कर दिया.
इसके साथ ही यामीन ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी. यह आपातकाल 45 दिनों तक चला. भारत ने इस आपातकाल का विरोध किया था. भारत ने कहा था कि मालदीव में सभी संवैधानिक संस्थाओं को बहाल करना चाहिए और आपातकाल को तत्काल ख़त्म करना चाहिए.
मालदीव में नाटकीय राजनीतिक संकट भारत को परेशान करने वाला था. इसी संकट के बीच यामीन ने चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब में अपने दूत भेजे. इसके बाद चीन ने चेतावनी दी कि मालदीव के आंतरिक मामले में किसी भी देश को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसमें रचनात्मक भूमिका अदा करे.
चीन ने कहा था कि किसी भी सूरत में मालदीव की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए. दूसरी तरफ़ मालदीव के विपक्षी नेता नशीद चाहते थे कि भारत मदद करे.
वो भारत से सैन्य हस्तक्षेप की भी उम्मीद कर रहे थे ताकि जजों को हिरासत से मुक्त कराया जा सके. नाशीद ने अमरीका से भी मदद की गुहार लगाई.
इस गतिरोध के बीच समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक चीनी न्यूज़ वेबसाइट के हवाले से बताया कि चीन के दो युद्धपोत मालदीव पहुंच गए हैं. भारतीय नेवी ने भी इस बात की पुष्टि की कि चीनी युद्धपोत सुंदा और लोंबोक जलडमरुमध्य से आगे बढ़ रहे हैं.